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“साहित्य में कल्पना जितनी भी हो, हवाई कुछ भी नहीं होता”
“साहित्य को दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी होना चाहिए”
“जेब और जरूरत के मुताबिक साहित्य”
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Shahar men Curfew
शहर में कर्फ्यू₹120.00Author – Vibhuti Narain Rai लेखक - विभूति नारायण राय | SAHITYA UPKRAM | HINDI| PAGE- 111 | 1986 | -
Ghar-Ghar Naazi
घर-घर नाजी₹180.00Author – Amrit Mehta लेखक - अमृत मेहता | SAHITYA UPKRAM | HINDI| PAGE- 160 | 2005 | -
Ram Rajya
राम राज्य₹250.00Author – Miitarsen meet लेखक - मित्रसेन मीत | SAHITYA UPKRAM | HINDI| PAGE- 652 | 2008|